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एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के 8वें राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन में एआई के युग में सत्य और जवाबदेही का आह्वान
पुणे, नवंबर 4, 2026: समाचारों की खपत पर एल्गोरिदम का बढ़ता प्रभाव, फर्जी खबरों के खतरे और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के इस दौर में जनविश्वास बनाए रखने की चुनौती, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) के 8वें राष्ट्रीय मीडिया और पत्रकारिता सम्मेलन के मुख्य विषय रहे। मीडिया एवं संचार विभाग द्वारा ‘संवाद, समावेशिता और शांति’ विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में बदलती सूचना प्रणाली में मीडिया की जिम्मेदारियों पर मंथन करने के लिए वरिष्ठ संपादक, पत्रकार, फिल्म निर्माता, कानूनी व नीति विशेषज्ञ और विज्ञापन क्षेत्र के दिग्गज एकत्र हुए।
उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. डॉ. रविराजा एन. सीताराम, कुलपति, एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) ने स्पष्ट किया कि छात्रों को पहले दिन से ही रोजगार-उन्मुख बनाने के लिए विश्वविद्यालय व्यावहारिक अनुभव (Experiential Learning) और पाठ्यक्रम में नवाचार पर जोर दे रहा है। भगवद्गीता के एक श्लोक का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा, “मीडिया और पत्रकारिता का भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी पर है। पहले प्रकाशित करना ही सफलता नहीं है—बल्कि सत्य की पुष्टि करना, विश्वसनीयता बनाए रखना और समाज के लिए उपयोगी जानकारी पहुंचाना ही असली सफलता है।”
स्वागत भाषण में एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स के डीन डॉ. अभिजीत नायर ने सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य रेखांकित करते हुए कहा, “आज हमारे सामने मुख्य प्रश्न केवल लोगों तक पहुंचने का नहीं है, बल्कि विचारपूर्वक और पूर्ण ध्यान देकर उनका विश्वास जीतने का है।”
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि, वरिष्ठ पत्रकार और डॉक्यूमेंट्री निर्माता रमेश मेनन ने ‘अटेंशन एज: मीडिया, एल्गोरिदम और विश्वास की लड़ाई’ विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने घटते अटेंशन स्पैन और एल्गोरिदम के बढ़ते वर्चस्व पर चिंता जताते हुए कहा, “आज संपादक बदल गया है। आज का संपादक एल्गोरिदम है और वह एल्गोरिदम आपसे यह नहीं पूछता कि ‘क्या यह सच है या महत्वपूर्ण है?’ उसका केवल एक ही उद्देश्य होता है—’क्या यह पाठक को बांधकर रख सकता है?'”
‘द हिंदू’ (हैदराबाद) के रेजिडेंट एडिटर रवि रेड्डी ने कहा कि एआई-जनरेटेड कंटेंट और डीपफेक के इस दौर में गति से ज्यादा सत्य की पुष्टि (Verification) महत्वपूर्ण है। एआई न्यूजरूम में मदद कर सकता है लेकिन मानवी निर्णय की जगह नहीं ले सकता। एल्गोरिदम केवल सहभागिता (Engagement) मापते हैं, जबकि पत्रकारिता जनमूल्य (Public Value) मापती है।
‘वॉइसेज, विजन्स एंड द फ्यूचर: रीशेपिंग मीडिया डिस्कोर्सेस’ विषय पर आयोजित समापन सत्र में मुख्य अतिथि ‘न्यूज 24’ की कंसल्टिंग एडिटर डॉ. मीना शर्मा ने मीडिया के समक्ष विश्वसनीयता की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज मीडिया के सामने विश्वसनीयता का बड़ा संकट है और गुणवत्तापूर्ण कहानियों के लिए जागरूक प्रयास की आवश्यकता है। मीडिया छात्रों को ऐसी कहानियां सामने लाने के लिए आगे आना चाहिए—चाहे वे मुख्यधारा के मीडिया के माध्यम से हों या सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके सीधे जनता तक पहुंचना हो।
साउंड डिजाइनर और एडिटर ए.एस.जी.के. तेजा ने सोशल मीडिया पर परस्पर विरोधी सूचनाओं से होने वाले भ्रम का अनुभव साझा किया और बताया कि वे सटीक जानकारी के लिए कैसे समाचार पत्रों की ओर वापस लौटे। उन्होंने कहा कि अखबार पढ़ने में कुछ मिनट बिताने से उन्हें सत्यापित जानकारी मिलने का पूरा भरोसा हुआ।
दो दिवसीय सम्मेलन में मुख्य भाषणों के अलावा चार अलग-अलग पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया। ‘जर्नलिज्म इन ट्रांजिशन: चेंजिंग मीडिया, ऑडियंस एंड न्यूज’ सत्र का संचालन हिंदुस्तान टाइम्स के मेट्रो एडिटर डॉ. योगेश जोशी ने किया, जिसमें रवि रेड्डी, विशाल खंडेलवाल, विशाखा निकम और अभिजीत अत्रे ने पत्रकारिता के व्यावसायिक दबाव और संपादकीय स्वतंत्रता पर चर्चा की।
‘सिनेमा रीइमेजिन्ड: एआई, वर्चुअल प्रोडक्शन एंड द फ्यूचर ऑफ इंडियन फिल्म मेकिंग’ सत्र का संचालन डॉ. मिथिला बिनीवाले ने किया, जिसमें ए.एस.जी.के. तेजा, फिल्म निर्माता अशोक विश्वनाथन और प्रो. जिजॉय राजागोपाल ने फिल्म निर्माण में एआई की भूमिका और मानवी रचनात्मकता के महत्व को रेखांकित किया।
‘सेफगार्डिंग डेमोक्रेसी: कन्वर्जेंस ऑफ मीडिया, लॉ, गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी’ सत्र का संचालन डॉ. श्रेया बेरा ने किया। इस सत्र में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी महेश झगड़े, प्रिया जैन, सिद्धार्थ बेनिंगर, प्रो. उज्जवला बर्वे और प्रो. नरेश बोधके ने मीडिया की स्वतंत्रता, गलत सूचनाओं के प्रसार और पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
‘पर्सुएशन रिवायर्ड: एआई, एडवरटाइजिंग, पीआर एंड द फ्यूचर ऑफ ब्रांडिंग’ सत्र का संचालन श्रीकांत अय्यर ने किया, जिसमें बेलिंडा डोकरस और सार्थक ठाकुर ने विज्ञापन एवं पीआर के क्षेत्र में एआई के उपयोग और उपभोक्ता विश्वास के निर्माण पर विचार व्यक्त किए। सम्मेलन का समापन छात्रों और पेशेवरों से वायरल संस्कृति के बजाय सत्यापन, नैतिकता और जनसेवा को प्राथमिकता देने के आह्वान के साथ हुआ।


